मुजफ्फरनगर : उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में बिजली कटौती को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन गया है। जिले में बिजली आपूर्ति बाधित होने से नाराज लोगों ने बिजलीघर पर हंगामा किया, जिसके बाद मामला थाने तक पहुंच गया। इस बीच प्रदेश सरकार में मंत्री अनिल कुमार का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर को सख्त लहजे में कार्रवाई रोकने की बात कहते नजर आ रहे हैं। हालांकि, मंत्री की नाराजगी के बावजूद बिजली विभाग की ओर से मामले में FIR दर्ज करा दी गई।
घटना के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर बिजली कटौती के विरोध में प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई होगी या नहीं और मंत्री के हस्तक्षेप के बाद भी विभाग ने मुकदमा क्यों दर्ज किया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मुजफ्फरनगर की गांधी कॉलोनी क्षेत्र से जुड़ा है। भीषण गर्मी के बीच इलाके में कई घंटों तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। बिजली नहीं आने से परेशान स्थानीय लोगों ने बिजलीघर पहुंचकर विरोध जताया।
बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने बिजली विभाग के कर्मचारी के साथ विवाद किया और लाइनमैन को बंधक बनाने का आरोप लगा। इसके बाद बिजली विभाग के अधिकारियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मंत्री अनिल कुमार ने चीफ इंजीनियर को किया फोन
मामला जब स्थानीय लोगों और नेताओं तक पहुंचा तो कुछ लोग मंत्री अनिल कुमार के पास पहुंचे। इसके बाद मंत्री ने बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर विनोद कुमार से फोन पर बातचीत की।
वीडियो में मंत्री विभागीय अधिकारी से नाराजगी जताते हुए नजर आ रहे हैं और लोगों पर मुकदमा दर्ज न करने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं।
मंत्री के इस रुख के बाद मामला और चर्चा में आ गया।
विभाग ने क्यों दर्ज की FIR?
मंत्री की आपत्ति के बावजूद बिजली विभाग ने शिकायत वापस नहीं ली। विभाग का कहना है कि कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में कानूनी कार्रवाई जरूरी थी।
अवर अभियंता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसमें कुछ नामजद और कुछ अज्ञात लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
बिजली कटौती से शुरू हुआ था विवाद
जानकारी के मुताबिक, इलाके में ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी। विभाग की टीम ने समस्या ठीक करने का प्रयास किया, लेकिन सप्लाई बहाल होने में देरी से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई।
इसके बाद लोगों ने बिजलीघर पहुंचकर विरोध किया। अधिकारियों का कहना है कि समस्या का समाधान किया जा रहा था, लेकिन विरोध के दौरान स्थिति बिगड़ गई।
मंत्री का रुख क्यों बना चर्चा का विषय?
सरकार में मंत्री होने के कारण अनिल कुमार के हस्तक्षेप को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। एक तरफ जहां मंत्री जनता की परेशानी को लेकर अधिकारियों पर नाराज दिखे, वहीं दूसरी तरफ विभाग ने कर्मचारियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए कार्रवाई आगे बढ़ाई।
बिजली विभाग का कहना- कर्मचारियों की सुरक्षा जरूरी
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फील्ड कर्मचारियों को कई बार कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। अगर उनके साथ मारपीट या दुर्व्यवहार की घटनाएं होती हैं तो कार्रवाई जरूरी है।
विभाग का तर्क है कि बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए कर्मचारियों को सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए।
गर्मी में बिजली संकट बना बड़ा मुद्दा
गर्मी के मौसम में बिजली कटौती लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति को लेकर सरकार और विभाग लगातार निगरानी की बात करते रहे हैं। इससे पहले भी बिजली व्यवस्था में लापरवाही को लेकर अधिकारियों पर कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं।
इलाके में बढ़ी सियासी हलचल
मुजफ्फरनगर की घटना अब सिर्फ बिजली समस्या तक सीमित नहीं रह गई है। मंत्री और बिजली विभाग के बीच सामने आए मतभेद ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया है।
विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा सकता है, जबकि विभाग अपनी कार्रवाई को नियमों के अनुसार बता रहा है।
आगे क्या होगा?
अब नजर इस बात पर है कि पुलिस जांच के बाद मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। साथ ही यह भी देखना होगा कि मंत्री के हस्तक्षेप के बाद इस विवाद का समाधान किस तरह निकलता है।
फिलहाल बिजली कटौती, जनता का विरोध और FIR—इन तीनों मुद्दों को लेकर मुजफ्फरनगर में चर्चा जारी है।
मुजफ्फरनगर बिजली विवाद ने एक बार फिर दिखाया कि आम जनता की समस्याएं जब प्रशासनिक कार्रवाई से टकराती हैं तो मामला तेजी से राजनीतिक रूप ले सकता है। जहां मंत्री अनिल कुमार ने लोगों के पक्ष में अधिकारियों पर नाराजगी जताई, वहीं बिजली विभाग ने कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर कानूनी कदम उठाया।
अब जांच के बाद ही साफ होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।